रविवार के दिन तुलसी पत्र, काली मिर्च दोनों आठ -आठ तथा सहदेई की जड़ लाकर तीनो को ताम्बे के यन्त्र में भर कर घुप देकर घारण करने से भूतादिक और ऊपरी बढ़ाये दूर होती
आश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ घर में रखने से सर्प का भय नहीं रहता पूर्वफल्गुनि नक्षत्र में बहेड़े का पत्ता लाकर घर में रखने से अभिचार प्रयोग का प्रभाव नहीं होता। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में नींबू की जड़ लाकर गाय के दूध में पीने से पुत्र होता है। हस्त नक्षत्र में चंपा की जड़ लाकर शिशु के गले में बांधने से नजर नहीं लगती है। अनुराधा नक्षत्र में चमेली कि जड़ को गले में बांधने से शत्रु मित्रवत व्यवहार करते है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में तुलसी की जड़ लाकर मस्तक पर रखे तो अग्नि भय नहीं होता। भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर कत्था लगाकर, सुपारी डालकर, चोरी वाले स्थान में रखें तो चोरी गई वस्तु का पता शीघ्र लगेगा। खच्चर का दांत जेब में या पर्स में रखने से व्यक्ति को कभी भी आर्थिक संकट नहीं झेलना पड़ता। काली बिल्ली का दांत ताबीज में धारण करने वाला व्यक्ति कभी भी संकटो का सामना नहीं करता। गधे का दांत यदि किसी के सिरहाने रख दिया जाये तो उसकी अनिंद्रा दूर हो जाती है।
काला जादू ख़त्म करता है और बुरी नज़र से बचाव करता है | नौकरी और व्यवसाय में आ रही अड़चनो को दूर करता है । सुलेमानी हकीक को धारण करने के बाद लोग आपकी तरफ आकर्षित होने लगते है और आपको महत्त्व देने लगते है । सुलेमानी हकीक एक ऐसा चमत्कारी पत्थर है जो आपको लोगो की बुरी नजर से बचा कर रखता है । आपका व्यवसाय काला जादू या टोना - टोटका की वजह से मंदा चल रहा है तो सुलेमानी हकीक पत्थर उसका काट कर देता है और व्यवसाय में बढ़ोतरी होती है । अगर घर में बरकत नही होती है तो बरकत होने लगती है | अगर आपके शत्रु ज़्यादा है या आपका शत्रु आपको परेशान करता है या आप पर जादू टोना करवाता है तो आपका उसके किए हुए जादू टोना से बचाव करता है और आपके शत्रु को परास्त करता है | आपका शत्रु आपके सामने शक्तिहीन हो जाता है | अगर आपकी सेहत सही नही रहती है आप बार बार बीमार होते है तो आपको सुलेमानी हकीक धारण करना चाहिए उस से आपकी सेहत में काफ़ी अच्छा सुधार होगा | सुलेमानी हकीक राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही बाधाओ को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता मिलने लगती है | आपको सुलेमानी हकीक शनिवार को धारण करना है व मध्यमा उंगली (mi...
किसी परिवार में बच्चे का जन्म होना परिवार में वंश वृद्धि का परिचायक है १ बच्चे के जन्म के साथ ही बच्चे की स्वस्थता जानने के उपरांत सबसे पहले सबका यही प्रश्न होता है कि बच्चे का जन्म किस पाये में हुआ है। शास्त्रों में मुख्य रूप से चार पायों का वर्णन मिलता है :- 1. चांदी का पाया 2. ताँबे का पाया 3. सोने का पाया 4. लोहे का पाया हर पाये में जन्मे बालक का शुभाशुभ फल भिन्न होता है। बालक/बालिका का जन्म किस पाये में हुआ है, ये निम्न विधि से आसानी से जाना जा सकता है। जन्म पत्रिका में लग्न से चन्द्रमा किस भाव में है ये देखा जाता है जैसे :- जन्म लग्न से चन्द्रमा यदि पहले, छठे या ग्यारहवें भाव में हो तो बच्चे का जन्म सोने के पाये में हुआ है। यदि दो, पांच या नौवें भाव में चन्द्रमा है तो बच्चे का जन्म चाँदी के पाये में हुआ है। जन्म लग्न से चन्द्रमा यदि तीसरे , सातवें या दसवें भाव में हो तो बच्चे का जन्म ताम्बे के पाये में हुआ है। जन्म लग्न से चन्द्रमा यदि चौथे, आठवें या बारहवें भाव में हो तो बच्चे का जन्म लोहे के पाये में हुआ है । इस तरीके से कुंडली में देखकर आसानी से बताया ...
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